Old Pension Scheme: भारत में सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद की आर्थिक सुरक्षा के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम एक महत्वपूर्ण व्यवस्था रही है। यह योजना दशकों तक लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद आर्थिक स्थिरता की गारंटी देती रही है। इस प्रणाली ने यह सुनिश्चित किया कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनकी अंतिम वेतन के आधार पर जीवनभर एक निश्चित मासिक आय प्राप्त होती रहे। आज भी बहुत से पुराने सरकारी कर्मचारी इस योजना को बेहद पसंद करते हैं और इसकी वापसी की मांग करते रहते हैं।
योजना की मुख्य विशेषताएं
ओल्ड पेंशन स्कीम एक परिभाषित लाभ सेवानिवृत्ति योजना थी जिसमें पेंशनधारक को जीवनभर एक तय मासिक पेंशन मिलती थी। इस पेंशन की राशि सेवानिवृत्ति से पहले मिलने वाले वेतन का पचास प्रतिशत होती थी। इसके अलावा पेंशनधारकों को महंगाई भत्ता और अन्य भत्ते भी जीवनभर मिलते रहते थे। यह योजना पूरी तरह से सरकार द्वारा वित्त पोषित थी और कर्मचारियों को इसमें कोई योगदान नहीं देना पड़ता था। सबसे बड़ी बात यह थी कि यह पेंशन बाजार के उतार-चढ़ाव से पूरी तरह स्वतंत्र थी, जिससे सेवानिवृत्त लोगों को निश्चित आय की गारंटी मिलती थी।
योजना में बदलाव की आवश्यकता
पहली जनवरी दो हजार चार को ओल्ड पेंशन स्कीम को नेशनल पेंशन सिस्टम से बदल दिया गया। यह एक निश्चित योगदान योजना है जिसमें रिटायरमेंट के समय मिलने वाली राशि कर्मचारी के योगदान और बाजार से मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करती है। यह परिवर्तन इसलिए किया गया क्योंकि पुरानी पेंशन योजना पर सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ बढ़ता जा रहा था। हर साल पेंशन का खर्च बढ़ रहा था और यह केंद्र तथा राज्य सरकारों के बजट पर गंभीर दबाव बना रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी योजना को पूरी तरह वापस लाने से सरकारी वित्त पर और भी अधिक दबाव पड़ सकता है।
वर्तमान में चल रही बहस
हाल के वर्षों में सरकारी कर्मचारी संगठनों और यूनियनों ने पुरानी पेंशन योजना की वापसी की मांग को तेज कर दिया है। कई कर्मचारी चाहते हैं कि या तो पुरानी योजना वापस लाई जाए या फिर एक ऐसी हाइब्रिड योजना बनाई जाए जो ओल्ड पेंशन स्कीम की सुरक्षा और नेशनल पेंशन सिस्टम की स्थिरता दोनों को मिलाए। कुछ राज्य सरकारों ने अपने स्तर पर ओल्ड पेंशन स्कीम जैसी योजनाएं शुरू करने का निर्णय लिया है। तमिलनाडु ने एश्योर्ड पेंशन स्कीम बनाई है जिसमें अंतिम वेतन का आधा हिस्सा पेंशन के रूप में देने की गारंटी दी जाती है।
केंद्र सरकार का रुख
केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि कानूनी और वित्तीय बाधाओं के कारण पुरानी पेंशन योजना को पूरे देश में वापस लाना संभव नहीं है। पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण की सीमाओं के कारण यह आधिकारिक एजेंडे में शामिल नहीं है। हालांकि सरकार कर्मचारियों की चिंताओं को समझती है और बेहतर विकल्प तलाशने का प्रयास कर रही है।
योजना से लाभान्वित होने वाले समूह
पुरानी पेंशन योजना और इसके आधुनिक संस्करणों से सबसे अधिक लाभ सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों को होता है। उन्हें मासिक आय में स्थिरता और निश्चितता मिलती है जो बाजार पर आधारित अनिश्चित रिटर्न से बेहतर है। इन योजनाओं में पारिवारिक पेंशन का भी प्रावधान होता है जो पेंशनधारक की मृत्यु के बाद उसके जीवनसाथी को मिलती है। यह सुविधा परिवार की दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
हालांकि पारंपरिक ओल्ड पेंशन स्कीम अब नई भर्तियों पर लागू नहीं होती, लेकिन इसकी विरासत आज भी भारतीय नीति निर्माण में जीवित है। कई सेवानिवृत्त लोगों और कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना की सुरक्षा आर्थिक स्थिरता का एक आदर्श मानक बनी हुई है। वर्तमान बहस और राज्य स्तरीय प्रयोग यह दर्शाते हैं कि यह मुद्दा अभी भी प्रासंगिक और महत्वपूर्ण बना हुआ है।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। पेंशन से संबंधित किसी भी निर्णय लेने से पहले कृपया आधिकारिक सरकारी स्रोतों या वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। यहां दी गई जानकारी कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।


